राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत लाखों बुजुर्ग और महिलाएं हर महीने आर्थिक सहायता पर निर्भर हैं। लेकिन अब इस सहायता पर संकट गहराता नजर आ रहा है, जिसका कारण है सत्यापन प्रक्रिया में भारी देरी।
राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने लगभग 8 लाख पेंशनधारकों की पेंशन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि विभाग की ओर से चल रहे सत्यापन कार्य में अब तक सभी लाभार्थियों की पुष्टि नहीं हो पाई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना सत्यापन के पेंशन जारी नहीं की जा सकती।
कुल पेंशनधारक: लगभग 93 लाख
अब तक सत्यापित: करीब 90% लाभार्थी
बचे हुए सत्यापन: 10% (करीब 8 लाख लोग)
इनमें ज्यादातर बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जो पूरी तरह इस सहायता पर निर्भर हैं।
सत्यापन की अंतिम तिथि: 30 मई 2025
राज्य के अधिकांश जिलों ने समय पर सत्यापन पूरा कर लिया, लेकिन जयपुर सबसे पीछे रहा।
जयपुर में 15% लाभार्थियों का सत्यापन अब भी लंबित है।
सत्यापन प्रक्रिया में धीमापन से लंबे समय से पेंशन अटकी पड़ी है—कुछ लोगों को तीन महीने से अधिक से कोई भुगतान नहीं हुआ है।
जिन लोगों की पेंशन रोकी गई है, उनमें अधिकतर बुजुर्ग, विधवा और निर्धन महिलाएं हैं।
इन लाभार्थियों के लिए यह पेंशन एकमात्र स्थायी आय का स्रोत है।
देरी के कारण उन्हें दवाइयों, राशन और अन्य जरूरी खर्चों में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पेंशनधारकों और उनके परिवारजनों ने प्रशासन से सत्यापन कार्य में तेजी लाने और पेंडिंग पेंशन तत्काल जारी करने की मांग की है।
कई सामाजिक संगठनों ने इसे सरकारी लापरवाही करार देते हुए विरोध जताया है।
राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह बचे हुए सत्यापन कार्य को प्राथमिकता पर पूरा करवाए।
साथ ही तीन महीने से लंबित पेंशन तुरंत जारी की जाए, ताकि असहाय लाभार्थियों को राहत मिल सके।
समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए चलाई जा रही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक तत्परता बेहद जरूरी है। सत्यापन जैसे कार्यों में देरी उन लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डालती है, जो पहले से ही सहारे के मोहताज हैं।
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