नागौर सांसद Hanuman Beniwal ने इसे बताया है दुर्भाग्यपूर्ण, कस दिया है ये तंज

जयपुर। नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के कहने पर भी उनसे मिलने के पास संसद भवन में नहीं बनाए जाने को लेकर तंज कसा है।

नागौर सांसद Hanuman Beniwal ने इसे बताया है दुर्भाग्यपूर्ण, कस दिया है ये तंज

जयपुर। नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के कहने पर भी उनसे मिलने के पास संसद भवन में नहीं बनाए जाने को लेकर तंज कसा है।

आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस संबंध में एक्स के माध्यम से कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यह संज्ञान में लाना चाहता हूं कि आपके मंत्रिमंडल में विदेश मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे कैबिनेट मंत्री डॉ.जयशंकर सांसदों को मिलने का समय नहीं देते और आपके विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के कहने से उन पीड़ितों को मिलने के पास संसद भवन में नहीं बनाए जा रहे हैं जिनके परिजन विदेश में किसी न किसी रूप में पीड़ित है।

बेनीवाल ने कहा कि आज रूस-यूक्रेन युद्ध में एजेंटों की धोखाधड़ी से रूसी सशस्त्र बलों में फंसे भारतीय नागरिकों के परिजनों के पांच सदस्य प्रतिनिधिमंडल के साथ मेरे द्वारा संसद भवन परिसर में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह से मुलाकात का समय मांगा गया और विदेश राज्य मंत्री के कार्यालय से दोपहर एक से दो बजे के मध्य मुलाकात का समय दिया गया और संसद भवन परिसर में पास बनाने वाली शाखा ने उन पांच सदस्य प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को यह कहकर उनका पास बनाने से इनकार कर दिया कि विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के मैसेज से संसद भवन परिसर में उनके कार्यालय में जाने के पास नहीं बनाए जा सकते जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि भारत के विदेश राज्य मंत्री की लाचारी को भी दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय सांसदों के साथ आए प्रतिनिधिमंडल से ही मुलाकात का समय नहीं देगा
आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने कहा कि विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की यह बेबसी से अब यह प्रश्न भी खड़ा हो गया है कि जिनके कहने से संसद भवन में उनके खुद के कार्यालय में उनसे मुलाकात करने आए व्यक्तियों के पास नहीं बन रहे हैं उनसे विदेश के मामलों में यह राष्ट्र कैसे अपेक्षा रखेगा? 

यह बात मेरे द्वारा लिखने का उद्देश्य यह है कि हमारे देश के नागरिक जो दुनिया के कई देशों में रहते है। वहां उन्हें जब कोई तकलीफ होगी तो उसके समाधान के लिए उनकी अपेक्षा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से ही होगी मगर विदेश मंत्रालय जब सांसदों के साथ आए प्रतिनिधिमंडल से ही मुलाकात का समय नहीं देगा तो फिर वो लोग आखिर कहां जाएंगे ?

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