ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने हलचल मचा दी है। ट्रंप ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका को इस युद्ध का सिर्फ 'सीजफायर' नहीं, बल्कि एक स्थायी और वास्तविक समाधान चाहिए। उनके हालिया बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका अब इस युद्ध में कोई निर्णायक कदम उठा सकता है।
कनाडा में G7 शिखर सम्मेलन से लौटते वक्त एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा –
"हम सिर्फ युद्धविराम नहीं चाहते, बल्कि एक असली अंत चाहते हैं।"
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष अब केवल कूटनीतिक बातचीत या अस्थायी विराम से नहीं सुलझेगा, बल्कि इसे हमेशा के लिए खत्म करना होगा।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा:
“ईरान को उस डील को पहले ही साइन कर लेना चाहिए था जो मैंने उनके सामने रखी थी। यह बहुत शर्मनाक है और मानव जीवन की भारी बर्बादी है। ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं हो सकते – मैंने इसे बार-बार कहा है!”
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि पिछली किसी गुप्त डील की पेशकश की गई थी, जिसे ईरान ने ठुकरा दिया। अब अमेरिका इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहता।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दावा किया था कि ट्रंप, इजरायल-ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत के लिए G7 से जल्दी निकल गए।
इस पर ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:
“मैक्रों को कोई अंदाजा नहीं कि मैं वॉशिंगटन क्यों जा रहा हूं, लेकिन इतना तय है कि इसका युद्धविराम से कोई संबंध नहीं है। ये उससे भी बड़ी बात है। इमैनुएल हमेशा गलत होते हैं – जानबूझकर या अनजाने में।”
ट्रंप के इन बयानों से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका सिर्फ मध्यस्थता करने तक सीमित नहीं रहेगा। “यह युद्धविराम से कहीं ज्यादा बड़ी बात है” जैसे शब्द यह संकेत देते हैं कि अमेरिका जल्द ही:
कोई बड़ा प्रस्ताव रख सकता है,
या फिर सीधे सैन्य हस्तक्षेप या कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर सकता है।
ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में साफ तौर पर कहा:
“सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए!”
यह एक चेतावनी भी हो सकती है कि अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान में किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में हैं।
क्या अमेरिका सीधे मैदान में उतरेगा? या कोई नई डील की घोषणा करेगा?
इसका जवाब आने वाले 48 घंटे में मिल सकता है।