एक दर्दनाक विमान हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। इस भयावह त्रासदी में जहां कुछ लोग चमत्कारिक रूप से मौत के मुंह से बाहर निकल आए, वहीं कुछ घरों की खुशियां चिता की आग में जलकर खाक हो गईं। ऐसी ही एक हृदय विदारक कहानी है 15 वर्षीय आकाश पटनी की, जिसे अपनी मां की आंखों के सामने दम तोड़ना पड़ा।
सीताबेन पटनी के लिए 17 जून का दिन कभी न भूल पाने वाला दर्द बन गया। उन्होंने नौ महीने तक जिसे कोख में पाला, दुलार कर बड़ा किया, वही बेटा उनके सामने आग की लपटों में समा गया। आकाश न तो विमान में सवार था और न ही अस्पताल परिसर में मौजूद किसी हेल्प स्टाफ का हिस्सा था। वह तो बस अपनी मां के लिए दोपहर का खाना पहुंचाने आया था।
सीताबेन, जो बीजे मेडिकल कॉलेज परिसर में चाय की छोटी सी दुकान चलाती हैं, खाना खाने में व्यस्त थीं। आकाश पेड़ के नीचे खाट पर लेट गया था। तभी आसमान से आई मौत – विमान का एक हिस्सा – सीधे उस खाट पर गिरा और उसे आग के हवाले कर गया। मां दौड़ी, चीखी, बेटे को बचाने की कोशिश की, पर आग की लपटों के आगे सब बेबस रह गया।
इस भीषण हादसे में जहां लगभग सभी की जान चली गई, वहीं एकमात्र जीवित बचे विश्वास कुमार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आग के गोलों से बाहर आते विश्वास को देखकर जहां लोगों को एक उम्मीद की किरण नजर आई, वहीं उसी वीडियो में सीताबेन की चीखें भी दर्ज हैं – अपने बेटे को आग से खींच निकालने की आखिरी जद्दोजहद।
हादसे में आकाश की पहचान भी सिर्फ DNA जांच से हो सकी। मंगलवार को उसका शव परिवार को सौंपा गया। इस अंतिम सत्यापन के बाद अब उनके घर में सिर्फ यादें हैं – वह हंसता-खेलता चेहरा, किताबों में डूबा वह होशियार बच्चा, और वो आंगन जहां उसकी शरारतें गूंजा करती थीं।
घर का सबसे छोटा और सबसे प्यारा सदस्य आकाश पढ़ाई में बेहद तेज था। उसके पिता बताते हैं कि आकाश से पूरे परिवार को बहुत उम्मीदें थीं। उन्होंने उसे डॉक्टर बनते देखने के सपने देखे थे, लेकिन अब वे सपने राख में बदल चुके हैं। पिता की आंखों से बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। उनका कहना है कि इस घाव को भरने में उन्हें कई साल लग जाएंगे – शायद पूरी जिंदगी भी कम हो।
आकाश को बचाने के प्रयास में सीताबेन भी बुरी तरह से झुलस गईं और इस वक्त अस्पताल में भर्ती हैं। उनका शरीर ही नहीं, उनकी आत्मा भी घायल है। वह मां, जो हर सुबह बेटे को दुलार कर जगाती थी, आज खुद अधमरी हालत में अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी है।
अहमदाबाद विमान हादसा सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना नहीं था, यह उन अनगिनत परिवारों के सपनों की चिता बन गया जो न तो विमान में थे और न ही यात्रा कर रहे थे। सरकार और प्रशासन को अब इस हादसे से सबक लेते हुए, सुरक्षा मानकों पर गंभीरता से विचार करना होगा।