बजट से पहले टैक्सपेयर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल
केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने में अब बहुत कम समय बचा है। जैसे-जैसे बजट का दिन नजदीक आ रहा है, टैक्सपेयर्स की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस बार पुराने इनकम टैक्स सिस्टम को पूरी तरह समाप्त कर देगी।
यह मुद्दा खासतौर पर मिडिल क्लास और होम लोन लेने वालों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि पुराने टैक्स सिस्टम में कई तरह की छूट और कटौतियां मिलती हैं, जिनसे टैक्स बोझ कम होता है।
फिलहाल भारत में दो इनकम टैक्स व्यवस्थाएं मौजूद हैं:
पुराना टैक्स सिस्टम, जिसमें HRA, होम लोन ब्याज, 80C निवेश और अन्य छूट मिलती हैं।
नया टैक्स सिस्टम, जिसमें टैक्स स्लैब सरल हैं लेकिन ज्यादातर छूट उपलब्ध नहीं हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 से सरकार ने नए टैक्स सिस्टम को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया है। यानी अगर कोई टैक्सपayer खुद से विकल्प नहीं चुनता, तो अपने आप नया टैक्स सिस्टम लागू हो जाता है। इसी फैसले के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि आने वाले समय में पुराना सिस्टम बंद किया जा सकता है।
हालांकि टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि Budget 2026 में पुराने टैक्स सिस्टम को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा, क्योंकि आज भी बड़ी संख्या में लोग इसी पर निर्भर हैं।
सरकार लगातार नए टैक्स सिस्टम को बढ़ावा दे रही है ताकि टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। कम छूट और आसान स्लैब वाला सिस्टम प्रशासनिक दृष्टि से भी सुविधाजनक माना जाता है।
लेकिन अचानक पुराने सिस्टम को हटाने से उन लोगों पर सीधा असर पड़ेगा जो होम लोन, HRA और निवेश से टैक्स बचाते हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट हिता देसाई के अनुसार, महानगरों में रहने वाले लोगों के लिए पुराना टैक्स सिस्टम आज भी बेहद जरूरी है।
पुराने टैक्स सिस्टम में:
होम लोन ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये तक की छूट मिलती है।
सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक निवेश पर टैक्स छूट मिलती है।
हेल्थ इंश्योरेंस (80D), एजुकेशन लोन ब्याज (80E), LIC, PPF और ELSS जैसी योजनाएं टैक्स बचाने में मदद करती हैं।
अगर सरकार पुराने सिस्टम को खत्म करती है और नए सिस्टम में इन छूटों की भरपाई नहीं करती, तो होम लोन लेने वालों पर टैक्स बोझ बढ़ सकता है।
नया टैक्स सिस्टम उन लोगों के लिए बेहतर है जो टैक्स प्लानिंग नहीं करना चाहते। इसमें:
टैक्स स्लैब आसान हैं
निवेश का प्रूफ देने की जरूरत नहीं
कागजी प्रक्रिया कम है
12 लाख रुपये तक की सामान्य आय पर टैक्स नहीं लगता, जिससे युवा और सैलरीड क्लास के लिए यह आकर्षक बन गया है।
सीनियर सिटीजन्स, होम लोन लेने वाले और ज्यादा कटौतियां लेने वाले लोग आज भी पुराने टैक्स सिस्टम को प्राथमिकता देते हैं। इनके लिए पुराना सिस्टम अक्सर ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नए टैक्स सिस्टम में होम लोन और बचत से जुड़ी सुविधाएं नहीं जोड़ी जातीं, तब तक पुराने सिस्टम को खत्म करना मुश्किल होगा।
टैक्स जानकारों के अनुसार, सरकार फिलहाल दोनों टैक्स सिस्टम को जारी रख सकती है और नए सिस्टम को और आकर्षक बनाने पर ध्यान दे सकती है।
कोई भी बड़ा बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जाएगा ताकि टैक्सपेयर्स पर अचानक बोझ न पड़े।
अब सभी की नजरें बजट भाषण पर टिकी हैं कि सरकार टैक्सपेयर्स को क्या राहत देती है और कौन सा सिस्टम आगे जारी रहेगा।