अहमदाबाद से गिरफ्तार हुईं कीर्ति पटेल, पिछले 10 महीनों से पुलिस को चकमा देती रही थीं, सूरत के बिल्डर से मांगी थी ₹2 करोड़ की फिरौती
सोशल मीडिया पर 1.3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स रखने वाली गुजरात की डिजिटल इन्फ्लुएंसर कीर्ति पटेल को सूरत पुलिस ने एक हनीट्रैप और फिरौती के मामले में गिरफ्तार किया है। 10 महीने से फरार चल रहीं कीर्ति को आखिरकार अहमदाबाद के सरखेज इलाके से तकनीकी टीम और साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से पकड़ा गया।
साल 2024 में सूरत के एक बिल्डर की शिकायत पर पुलिस ने हनीट्रैप और फिरौती के आरोप में 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें से चार पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे, लेकिन कीर्ति पटेल फरार चल रही थीं।
DCP जोन-1, आलोक कुमार के अनुसार,
“कीर्ति पटेल ने एक बिल्डर से ₹2 करोड़ की फिरौती मांगी थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। पिछले 10 महीनों से वह लगातार लोकेशन और सिम कार्ड बदलती रहीं।”
पुलिस ने बताया कि कीर्ति ने फरारी के दौरान भी सोशल मीडिया से दूरी नहीं बनाई। वह लगातार Instagram और YouTube पर एक्टिव रहीं। उनके Instagram अकाउंट पर प्रयागराज महाकुंभ की तस्वीरें और अप्रैल में जन्मदिन पर वीडियो मैसेज भी पोस्ट किया गया था।
पुलिस ने Instagram से जुड़ी लोकेशन डिटेल्स निकालकर उनकी IP एड्रेस लोकेशन ट्रेस की और अहमदाबाद पुलिस की मदद से उन्हें सरखेज इलाके से गिरफ्तार किया।
कीर्ति पटेल, जिन्हें कीर्ति अदालजा के नाम से भी जाना जाता है, एक गुजराती डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं।
उन्होंने 2019 में YouTube पर वीडियो पोस्ट करना शुरू किया और अब उनके लगभग 2 लाख सब्सक्राइबर्स हैं।
पुलिस के मुताबिक, कीर्ति पर भूमि कब्जा, सोशल मीडिया पर धमकी भरे पोस्ट करने जैसे कई अन्य मामलों की भी शिकायतें दर्ज हैं।
FIR दर्ज होने के बाद भी उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खुलेआम मौजूदगी बनाए रखी और एक वीडियो में यह दावा भी किया कि उनका एक मामला रद्द कर दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि कीर्ति से अब अन्य मामलों में भी पूछताछ की जाएगी। उनके खिलाफ आर्थिक अपराध, साइबर धमकी, और जमीन हड़पने जैसे मामलों की भी जांच की जा रही है।
कीर्ति पटेल की गिरफ्तारी केवल एक हनीट्रैपिंग केस की कहानी नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और कानूनी जिम्मेदारी के बीच बढ़ते टकराव का उदाहरण भी है। यह मामला यह भी दिखाता है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रियता पुलिस जांच में मददगार या बाधक दोनों बन सकती है।