ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए आज बेहद अहम दिन है। वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की निर्धारित अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। यदि पात्र करदाता इस समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो बाद में रिटर्न फाइल करने पर उन्हें लेट फीस के साथ-साथ टैक्स देनदारी पर ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है।
टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक जिन नौकरीपेशा लोगों की आय का मुख्य स्रोत केवल वेतन है और जिनके सभी दस्तावेज पहले से तैयार हैं, वे करीब 30 मिनट में अपना ITR दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए पहले से जरूरी दस्तावेज अपने पास रखना जरूरी है।
रिटर्न दाखिल करने से पहले इन दस्तावेजों की जांच कर लें—
Form 16
Form 26AS
Annual Information Statement (AIS)
बैंक खाते की जानकारी
सेविंग अकाउंट और FD से मिली ब्याज आय
यदि लागू हो तो कैपिटल गेन का विवरण
इन दस्तावेजों की मदद से रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाती है।
इनकम टैक्स पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें बिना जांचे स्वीकार कर लिया जाए। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक करदाता को Form 16, AIS और Form 26AS में उपलब्ध जानकारी का मिलान अवश्य करना चाहिए।
यदि ब्याज आय, निवेश से कमाई या कैपिटल गेन जैसी कोई जानकारी छूट जाती है, तो भविष्य में नोटिस या अतिरिक्त टैक्स की स्थिति बन सकती है।
भले ही रिटर्न में डेटा स्वतः भरकर आए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी करदाता की ही होती है। इसलिए सबमिट करने से पहले प्रत्येक विवरण को सावधानी से सत्यापित करना जरूरी है। गलत जानकारी या अधूरी आय दिखाने पर बाद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यदि 31 जुलाई की तय समय सीमा निकल जाती है और उसके बाद रिटर्न दाखिल किया जाता है, तो आयकर नियमों के अनुसार लेट फीस देनी होगी।
वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक होने पर अधिकतम ₹5,000 की लेट फीस लग सकती है।
वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक होने पर ₹1,000 की लेट फीस देनी पड़ सकती है।
यदि टैक्स देनदारी बची हुई है, तो उस पर लागू ब्याज भी देना होगा।
समय सीमा के भीतर रिटर्न भरने से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं—
लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज से बचाव।
पात्र मामलों में बिजनेस या कैपिटल लॉस को अगले वर्षों में Carry Forward करने की सुविधा।
टैक्स रिफंड मिलने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होती है।
पात्र करदाताओं के लिए नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था (जहां नियम लागू हों) के विकल्प का लाभ समय पर उपलब्ध रहता है।
यदि आपने अभी तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें। सभी दस्तावेजों का मिलान करें, प्री-फिल्ड जानकारी की पुष्टि करें और रिटर्न जमा करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना भी न भूलें। समय पर ITR दाखिल करने से अनावश्यक जुर्माने, ब्याज और भविष्य की परेशानियों से बचा जा सकता है।