जानिए! भगवान विष्णु के 10 अवतारों के बारे में ...

Samachar Jagat | Friday, 25 Nov 2016 04:46:41 PM
10 incarnations of Lord Vishnu

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। सर्वव्यापक भगवान विष्णु समस्त संसार में व्याप्त हैं कण-कण में उन्हीं का वास है उन्हीं से जीवन का संचार संभव हो पाता है संपूर्ण विश्व भगवान विष्णु की शक्ति से ही संचालित होता है वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं। पुराणों में भगवान विष्णु के दशावतारों का वर्णन है। इनमें से नौ अवतार हो चुके हैं और दसवां अवतार कलियुग में होगा।

धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार कल्कि अवतार कहलाएगा। पुराणों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह अवतार होगा, इसलिए इस दिन कल्कि जयंती का पर्व मनाया जाता है। अभी तक भगवान विष्णु ने 9 अवतार लिए हैं। इन अवतारों के पीछे का कारण मानव जाति का कल्याण करना था और भगवान विष्णु 10 वां अवतार भी जीवमात्र के कल्याण के लिए ही लेंगे।

भगवान विष्णु ने अब तक लिए ये अवतार :-

मत्स्य अवतार :-

इस अवतार में भगवान विष्णु ने मछली का रूप धारण किया और पृथ्वी के जल मग्न होने पर ऋषि- मुनियों समेत कई जीवों की रक्षा की। भगवान ने ऋषि की नाव की रक्षा की तथा ब्रह्मा जी ने पुनः जीवन का निर्माण किया। एक अन्य कथा अनुसार शंखासुर राक्षस जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा गया तब विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को मुक्त करके उन्हें पुनः स्थापित किया।

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कूर्म अवतार  :-

इस अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर समुद्र मंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था उनकी सहायता से देवों एवं असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नों की प्राप्ति की।

वराह अवतार :-

इस अवतार में भगवान विष्णु ने पृथ्वी कि रक्षा की थी, एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध किया था। हिरण्याक्ष हिरण्यकश्यप का भाई था।

भगवान नृसिंह :-

भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था। जब हिरण्यकश्यप को इस बात का पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुआ और प्रह्लाद को समझाने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी जब प्रह्लाद नहीं माना तो हिरण्यकश्यप ने उसे मृत्युदंड दे दिया। जब हिरण्यकश्यप स्वयं प्रह्लाद को मारने ही वाला था तब भगवान विष्णु नृसिंह का अवतार लेकर खंबे से प्रकट हुए और उन्होंने अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध कर दिया।

वामन अवतार :-

सतयुग में प्रह्लाद के पौत्र दैत्यराज बलि ने स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया। सभी देवता इस विपत्ति से बचने के लिए भगवान विष्णु के पास गए और देवताओं की इस विपत्ति का निदान करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया।  

बुद्ध अवतार :-

धर्म ग्रंथों के अनुसार बौद्धधर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध भी भगवान विष्णु के ही अवतार थे। पुराणों में वर्णित भगवान बुद्धदेव का जन्म गया के समीप कीकट में हुआ था और उनके पिता का नाम अजन था। यह प्रसंग पुराण वर्णित बुद्धावतार का ही है।

परशुराम अवतार :-

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार परशुराम भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक थे। ऋषि आपव ने क्रोधित होकर सहस्त्रबाहु को श्राप दिया कि भगवान विष्णु परशुराम के रूप में जन्म लेंगे और न सिर्फ सहस्त्रबाहु का बल्कि समस्त क्षत्रियों का सर्वनाश करेंगे। इस प्रकार भगवान विष्णु ने भार्गव कुल में महर्षि जमदग्रि के पांचवें पुत्र के रूप में जन्म लिया और पृथ्वी को सत्रह बार क्षत्रियों से विहीन किया।

राम अवतार :-

त्रेतायुग में राक्षसराज रावण का बहुत आतंक था। उससे देवता भी डरते थे। उसके वध के लिए भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या के गर्भ से पुत्र रूप में जन्म लिया। इस अवतार में भगवान विष्णु ने अनेक राक्षसों का वध किया और मर्यादा का पालन करते हुए अपना जीवन यापन किया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने राम अवतार लेकर देवताओं को भय मुक्त किया।

श्रीकृष्ण अवतार :-

द्वापरयुग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार लेकर अधर्मियों का नाश किया।   भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने इस अवतार में अनेक चमत्कार किए और दुष्टों का सर्वनाश किया। कंस का वध भी भगवान श्रीकृष्ण ने ही किया। महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथि बने और दुनिया को गीता का ज्ञान दिया। धर्मराज युधिष्ठिर को राजा बना कर धर्म की स्थापना की। भगवान विष्णु का ये अवतार सभी अवतारों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

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कल्कि अवतार :-

धर्म ग्रंथों के अनुसार कलयुग में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे। कल्कि अवतार कलियुग व सतयुग के संधिकाल में होगा। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। पुराणों के अनुसार उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे। कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुनरूस्थापना करेंगे। भारत में कल्कि अवतार के कई मंदिर भी हैं, जहां भगवान कल्कि की पूजा होती है। यह भगवान विष्णु का पहला अवतार है जो अपनी लीला से पूर्व ही पूजे जाने लगे हैं। जयपुर में हवा महल के सामने भगवान कल्कि का प्रसिद्ध मंदिर है। इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान कल्कि के साथ ही उनके घोड़े की प्रतिमा भी स्थापित है।  

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